Last YJA Ceremony

YJA 2016

इंदौर गोम्मटगिरी में यंग जैना अवार्ड में प्रतिभाओं का हुआ आत्मीय सम्मान:

 
गोम्मटगिरी (इंदौर)। आचार्य श्री विद्यासागर जी के शिष्य मुनिश्री क्षमा सागर जी की प्ररेणा से आयोजित  यंग जैन अवार्ड ( जैन युवा प्रतिभा सम्मान ) के  समारोह में देश के 19राज्यों से आईं होनहार जैन प्रतिभाओं का आत्मीय सम्मान देश की सुप्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ व राजनीतिज्ञ कोटा (राज.)की पूर्व महापौर श्रीमती रत्ना जैन ने किया। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर मे स्थित प्रसिद्ध जैन अतिशय क्षेत्र गोम्मटगिरी जी में मैत्री समूह के तत्वावधान में आयोजित वर्तमान के सर्वाधिक प्रतिष्ठित "अखिल भारतीय जैन युवा प्रतिभा सम्मान" हेतु देशभर से लगभग 23 राज्यों से 2000 प्रतिभाओं की प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं।  जिसमे से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली लगभग 200 प्रतिभाओं को सम्मान समारोह में आमंत्रित कर आत्मीय एवं गरिमापूर्ण के साथ सम्मानित किया गया। इन में 112 विद्यार्थी ऐसे हैं जिन्होंने अपनी बोर्ड क्लास में शत-प्रतिशत अंक पाए हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा (PSC)परीक्षा में चयनित 25 अवार्डियों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया।
 
यंग जैना अवार्ड 2016 का गरिमामय आयोजन पूर्ण भव्यता के साथ गोमटगिरी जी इन्दौर में सम्पन्न हुआ। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज और मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज की प्रेरणा से आयोजित होने वाले यंग जैना अवार्ड का आयोजन इस वर्ष का गोमटगिरी जी, इन्दौर में दिनाक 8 एवं 9 अक्टूबर को किया गया। मैत्री समूह के सदस्य और देश भर से आये वालियंटियर्स  ने सर्वप्रथम गोमटेश बाहुबली भगवान के श्री चरणों मे सामूहिक रूप से शांतिनाथ भगवान का स्त्वन शांति विधान के रूप में अत्यंत भावनाओं से भर कर किया।  शाम होते होते बादलों ने भी इस आयोजन की अनुमोदना करते हुए अमृत बरसाया और भूमि की शुद्धि कर दी।
मैत्री समूह द्वारा मुनिश्री क्षमासागर जी महारज के जीवन पर आधारित एक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया था जिसमें मुनिश्री का जीवन परिचय, उनका साहित्य, उनके  द्वारा दिया जाने वाला शंका का सटीक समाधान, उनके संस्मरण और जैन धर्म का वैज्ञानिक पक्ष प्रस्तुत किया गया था। अपराह्न 12.30 सारे अवार्डी मंच के समीप पहुँचे जहाँ पर एक भव्य शोभा यात्रा के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। सर्वप्रथम जिन धर्म की ध्वजा और उसके पीछे अलग अलग राज्यों के ध्वज लेकर अवार्डी बच्चे और वालियंटियर्स का समूह बहुत ही व्यवस्थित रूप में मन्दिर परिसर की परिक्रमा करते हुए प्रदर्शनी स्थल पर पहुँचा जहाँ पर प्रदर्शनी का उद्घाटन श्रीमती वंदना बड़जाते, कोटा  द्वारा किया गया। सभी प्रत्यक्षदर्शीयों के द्वारा प्रदर्शनी की बहुत सराहना की गयी। फिर यह  शोभायात्रा ध्वजारोहण के स्थान पर पहुँची जहाँ मंत्रोच्चार के साथ मंगल ध्वजारोहण समपन्न हुआ और पूर्व/उत्तर दिशा में ध्वजा के फहरते ही मुनिश्री के मंगल आशीष की अनुभूती उपस्थित जन समुदाय को हुई।
कार्यक्रम के पहले दिन 8 अक्टूबर को दोपहर साढ़े 2 बजे पहले सत्र का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ।  इंजी. योगेन्द्र जैन, लंदन एवं श्रीमती रेशु जैन, मुम्बई ने यंग जैना अवार्ड का जोरदार आगाज किया.  इसके बाद  IIM बंगलौर के प्रोफेसर, विशेषज्ञ व विनियोजक श्री राकेश गोधवानी जी ने स्व रोजगार शुरुआत हेतु  कौशल विकसित कराये. इसके पश्चात अहमदाबाद से आये हुए श्री कुणाल गुप्ता और अर्शदीप कौर जी ने सफल अन्त्रप्रेउशिप के अनुभव और मन्त्रो से सभी को अवगत कराया। परमपूज्य आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी के आशीर्वाद से स्थापित हथकरघा उद्योग के निर्देशक ब्र.श्री अमित जैन M.Tech IIT Delhi के द्वारा हथकरघा उद्योग एवं रोहित भैया जी ने जैविक खेती,बायोगैस प्लांट, गौशाला पर आधारित उद्योग के बारे मे अवार्डी बच्चों को मार्गदर्शन दिया गया।
8  अक्टूबर को सायं 7 बजे पुज्य बाहुबली भगवन के चरणों में सभी बच्चों ने आरती और भक्ति  की,  पूज्य मुनिश्री के जीवन पर आधरित वृतचित्र भी दिखाया गया.  इसके बाद अनुभव ने जैन दर्शन से सम्बन्धित एक ज्ञानवर्धक व् रोचक मैत्री किव्ज के माध्यम से बहुत ही सरलता से जैन धर्म के मूलभूत सिद्धांतो को सभी को समझाया गया।
दूसरे दिन का प्रारम्भ हुआ प्रभु स्मरण के साथ और सारे लोगों ने प्रभात फेरी के रूप में भक्ति करके अपने दिन की शुरुवात की। तत्पश्चात सभी अवार्डियों को सामूहिक अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन करवाई गई जिसमे लगभग 50 अवार्डी भाइयों ने श्री जी का अभिषेक किया। शांतिधारा का प्रथम अवसर उन भाइयों को मिला जिन्होने वर्ष में एक दिन अभिषेक का संकल्प लिया अथवा प्रतिदिन मेरी भावना के पाठ के लिये संक्लपित हुए। आखिर ये छोटे संकल्प ही तो बडे संस्कारों की नीव बनते हैं।  कार्यक्रम में यंग आर्केस्ट्रा झांसी के मधुर भजनों ने श्रोताओं को आनंदित किया। प्रातः 10 बजे के पहले सत्र में अमेरिका से आई एक्सपर्ट ट्रेनर सुश्री सुरभि पांड्या ने पुज्य मुनि श्री के संस्मरण के साथ पर्सनाल्टी डेवलपमेंट पर सारगर्भित व्याख्यान देते हुए जीवन में आगे बढ़ने के कारगर टिप्स दिए। इसके बाद श्री रीतेश जैन (Director T.I.M.E. Institute Ghaziabad) ने बच्चों को कैरियर काउंसलिंग दी गई ।
प्रतिभाओं के सम्मान का मुख्य आयोजन दूसरे दिन 9 अक्टूबर को दोपहर 1.30बजे प्रारंभ हुआ, जिसकी भव्यता, अनुशासन, प्रबंधन एवं गरिमा देखते ही बनती थी।  सम्मान की श्रंखला में सबसे पहले राज्य प्रशासनिक सेवा मे चयनित 20 छात्रो का आत्मीय सम्मान किया गया। इसके बाद कक्षा 10 वीं मे 10 CGPA अंक पाने बाले अवार्डियों जिन्होने अपने सभी विषयों में 100 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं, तथा साथ ही कक्षा 10वीं के उच्च अंक प्राप्त अन्य छात्रों का भी सम्मान किया गया। कक्षा 12 वीं मे कला, वाणिज्य, एवं विज्ञान, के छात्रो के साथ प्रतियोगी परीक्षआओ मे चयनित छात्रो का भावभीना सम्मान किया गया। छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्रीमती रत्ना जैन ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने के साथ-साथ अपने धर्म और संस्कार को न भूले, अपने आप को बहुत प्रतिभाशाली बनाये और अपनी बात को प्रतिभाशाली ढंग से रखे, विदेश जाने में कोई बुराई नही है परन्तु हम अपने संस्कार न भूले, हम जैन है तो वाकई मे सच्चे है आप सभी जन जन्म से भी श्रेष्ठ है और कर्म से भी श्रेष्ठ है। इससे पूर्व वरिष्ठ साहित्यकार
प्रो.(डॉ.) सरोजकुमार जी ने अपने सरल सुबोध  उध्वोधन मे कहा कि लौकिक शिक्षा प्राप्त करते हुऐ धर्म से विमुख न हो यह क्षमासागर जी ने युवाओं के पीठ पर हाथ रखते हुऐ सिखाया। मंच यहाँ खाली नही है मेरी कल्पना मे मुनि क्षमासागर जी यहाँ बैठे है। प्रथम पंक्ति के कवि थे लेकिन तृतीय, चतुर्थ पंक्ति मे रहते थे, क्योंकि उनकी प्रथम पंक्ति उनकी चर्या और त्याग था।लोगों ने यह पहचाना कि वह साधारण कवि नही बल्कि अनूठा कवि है, महाराज जी एक पेड़ है जिस पर हम सब चिड़िया आकर सुखद अनुभव करते है,
उपस्थित जनसमुदाय को  यंग जैन अवार्ड की यात्रा पर आधारित विडियो दिखाया गया. अवार्डियों से जीवन में कभी व्यसन न करने का संकल्प पत्र भी भराया गया। अंत में जय जिनेन्द्र के गान का गुणगान करते हुए मैत्री समूह के सभी सदस्यों ने सभी अवार्डी, उनके माता-पिता एवं आमंत्रित अतिथियो से मंच से हाथ जोड़ कर क्षमा याचना की गई । सीनियर अवार्डी योगेंद्र जैन, लंदन ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस मुख्य सम्मान समारोह का संचालन श्री राजेश बड़कुल, छतरपुर एवं श्रीमती आभा जैन कॉमर्शियल टैक्स ऑफिसर जबलपुर ने बखूबी किया।
10 अक्टूबर को सम्मानित प्रतिभाएं पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के दर्शनाथ भोपाल ले जाया गया ।
सभी ने पुज्य आचार्य भगवन के दर्शन, पूजन, आहारचर्या का लाभ लिया, तथा पुज्य आचार्य भगवन ने सभी अवार्डी बच्चों को खूब-खूब आशीर्वाद दिया।
संघस्थ मुनिराज श्री प्रसाद सागर जी, मुनि संभव सागर जी, मुनि सौम्य सागर जी, मुनि निश्चल सागर जी एवं अन्य मुनिराजो से अपनी समस्याओं का समाधान करते हुए अपने जीवन को अच्छा बनाने के लिए व्रत-नियम ग्रहण किये तथा खूब आशीर्वाद प्राप्त किया।
 
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Feelings

लाजबावव बहुत अच्छा। मुझे यह कार्यक्रम बहुत अच्छा लगा है। मुझे लगता है कि ‘युवा जैना अवार्ड’ प्रतिवर्ष होना चाहिए। इससे बच्चे प्रोत्साहित ही नहीं होते बल्कि बच्चों के लिए विभिन्न क्षेत्र से आए प्रतिभावान बच्चों से मिलने का भी मौका मिलता है।सभी प्रवक्ताओं द्वारा दिए गए निर्देशन द्वारा हम अपने जीवन में जरूर ही सुधार करेंगे। कार्यक्रम में ऐसा लगा ही नहीं कि हम कहीं बाहर आये, एक दम अपनापन ही लगा, मैं बहुत ही खुश हूँ।

अभिनवजैन, रहली ;Reg ID ( MPX15114)

I felt extremely happy after joining this great and adorable event. I felt that Munishree was actually showering his benediction upon me.

मेरी तहे दिल से ये इच्छा है कि मैं मुनिजी के दिखाए पथ पर चलूँ।

’दुःखीमाणासालामदतकरण्यासाठीलांबबलेलाएकहात, प्रार्थनेसाठीजोडलेल्यादोनहातांपेक्षाअधिकउपयुक्तआहे।’ (दुखी मनुष्य कि मदद करने के लिए उठाया गया एक हाथ प्रार्थना करने के लिए जोडे गए दोनों हाथों कि अपेक्षा अधिक उपयोगी है।)

If I could help you in future in anyway, it would be my great pleasure 

Pallavi Jain, Jabalpur (Reg ID: CBA15001)

मुस्कराते हुए, स्वागत को तत्पर चेहरे, सकारात्मक वातावरण, ऊर्जा से भरपूर, समर्पित कार्यकर्ता एवं पारदर्शी माहौल।ठीक ऐसा लगा मुझे मैत्री समूह का परिवेश।यहाँ आकर महसूस हुआ कि धार्मिक अनुष्ठानों से भिन्न एक बुद्धि जीवी मंच भी है जहाँ योग्य छात्रों को अच्छे संस्कार देने के साथ साथ सम्मानित भी किया जाता है। यह मुनि क्षमा सागर जी की दूर दर्शिता का परिणाम है जो स्वयं कवि हृदय होने के साथ सत्य के श्रेष्ठ खोजकर्ता थे। मैत्री समूह को भविष्य में भी इसी प्रकार कार्य करते रहने के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।

मेधावी जैन, लेखिका एवं कवयित्री, चीफगेस्ट। YJA 2015

This program is very useful for Jain students, because we Jains are in minority and we do not get lot of opportunities and exposure. I am thankful to Maitree Samooh as it gives us lot of opportunities and exposure. And they do it without any expectations in return. I loved to see that all the members are modest and helpful in nature. I hope that I will make you proud by doing great work in my field. I am very thankful to you for inviting me to this event.

Paridhi Jain, Balaghat (Reg ID: MPA15010)

This is my first YJA. It is a very big opportunity for me. All the sessions were very inspiring, motivational, knowledgeable and admirable as we could learn many new things about our religion, about our career and so on.

It is one of the most awesome experiences of my life and I am very thankful to all the members of Maitree Samooh and volunteers who selected me for this award.

Thank you so much.

Sameeksha Jain, Tikamgarh (Reg ID: CBSR15017)

 


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